मेरठ। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शुक्रवार हुई हिंसा में मारे गए छह लोगों के परिजनों से मिलने आ रहे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका वाड्रा को मेरठ पुलिस ने परतापुर परतापुर थाने के पास रोक दिया। पुलिस के आग्रह पर वे दिल्ली लौट गए। प्रियंका वाड्रा ने फोन पर हिंसा में मारे गए लोगों परिजनों से बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ हैं। जल्द मिलने भी आएंगी।
दिल्ली लौटने से पहले प्रियंका वाड्रा ने मीडिया से कहा, हम हिंसा पीड़ित परिवारों से मिलने जा रहे थे लेकिन मेरठ में धारा 144 का हवाला देकर पुलिस जाने नहीं दिया। हमें उनसे मिलने रोका गया। हम कोई टकराव नहीं चाहते हैं इसलिए लौट रहे हैं। उन्होंने कानूनव्यवस्था पर तंज भी कसा और कहा कि नागरिकता संशोधन कानून की आग में जबरन लोगों को झोंका जा रहा हैराहुल गांधी से जब पूछा गया कि क्या भाजपा सरकार आपको जनता तक पहुंचने से रोकना चाहती है, वे बस इतना बोले कि अब आप देख लीजिए, यहां क्या हो रहा है। राहुल बोले, पुलिस से रोके जाने का हमने आदेश मांगा, लेकिन उन्होंने आदेश नहीं दिखाया। बस लौट जाने को कहते रहे
पुलिस ने जब परतापुर थाने के पास काफिला रोका और धारा 144 के उल्लंघन की बात की तो दोनों पक्षों के बीच ऑर्डर की कॉपी को लेकर बहस चली। लगभग पांच मिनट की बातचीत के बाद राहुल गांधी ने वापस लौट जाने का निर्णय किया। उनके साथ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी भी थे। प्रमोद तिवारी ने कहा कि हम मृतक के परिजनों को सांत्वना देने के लिए जा रहे थे। बारबार हमें रोका गया। कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका का हवाला दिया गया। हमने आश्वस्त भी कराया, लेकिन पुलिस नहीं मानी। यह सबकुछ भाजपा के इशारे पर किया जा रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार हमें पीड़ित परिवार तक से नहीं मिलने दे रही है। क्या यही लोकतंत्र है?
बता दें कि इससे पहले राहुल-प्रियंका काफिले को जब मोहिउद्दीनपुर में सीओ ब्रह्मपुरी चक्रपाणि त्रिपाठी ने रोकने का प्रयास किया तो वे कुचलने से बाल-बाल बचे। सीओ हट गए, वरना दुर्घटना घट सकती थी। बाद में परतापुर थाने के पास घेराबंदी कर उन्हें रोका गया और वहीं से उन्हें दिल्ली भेजा गया।